डॉक्टर होते है भगवान का रूप, सरकारी अस्पतालों में कराएं अपना इलाज।

कहते है डाक्टर भगवान का एक रूप है। आजकल हजारों किस्म की बिमारियों नें जन्म ले लिया है। अचानक नई किस्म की बिमारियां इलाके में फैल जाती है। जिनका इलाज करवाना गरीब लोगों के लिए बडी चुनौतियों बन गई है। वैसे तो सरकार ने इलाकों व गांवो में सरकारी अस्पताल खोली हुई है मगर उन अस्पतालों में इलाज करनें वाले डॉक्टरों व नर्सों की भारी कमी है। और दवाईयां भी प्रर्याप्त मात्रा में नही मिल पाती है। लेकिन गरीब लोग सरकारी अस्पतालों के भरोसे ही बैठे रहते है और काफी लोगों को अपनी जान गंवानी पड जाती है मगर उनके पास कोई रास्ता नहीं है। अगर प्राइवेट अस्पतालों में अपनें मरीजों का इलाज कराने के लिए ले जाएं तो सावधान होकर जाएं प्राइवेट अस्पतालों का इलाज तो गरीब की जमीन भी बिचवा देता है। प्राइवेट अस्पतालों में मरीज का ठीक होना मायना नही रखता उनका बिल वसूलना मायना रखता है।
आपको बता दें कि मौहम्मद वारिस पुत्र जाकिर निवासी मालब उम्र 21 साल बीते रमजानों से 4 दिन पहले तावडू रोड़ पर स्थित पेट्रोल पम्प से पेट्रोल लेकर वापसी अपनें घर की तरफ लौट रहा था तभी अचानक एक वैगनार गाड़ी तावडू की और से तेज स्पीड से आई और मोटरसाइकिल पर सवार वारिस को टक्कर मार दी जिसको गंभीर रूप से घायल व बैहोशी की हालात  में नल्हड अस्पताल में भर्ती कराया गया। जिसकी गंभीर हालात देखकर नल्हड अस्पताल के डॉक्टरों द्वारा दिनांक 24/5/2017 को सफदरजंग अस्पताल दिल्‍ली के लिए रैफर कर दिया और 5 दिन बाद सफदरजंग हॉस्पिटल से वापसी नल्हड के लिए बैहोशी की हालत में रैफर कर दिया सरकारी अस्पतालों की हालत देखकर जाकिर नें अपनें बेटे की छुट्टी करा ली और मित्तल अस्पताल अलवर में उपचार के लिए भर्ती करा दिया जहां पर 10 दिन का उपचार में 1 लाख 19 हजार का खर्चा आया जिसमे बाया पैर का आप्रेशन किया गया और पांव में रोड डाली गई जिससे इलाज होना तो दूर उल्टा पैसा देकर पांव के स्क्रू खराब कर दिए अगर प्राईवेट अस्पताल मित्तल के भरोसे रहता तो पांव कटनें के अलावा और कोई रास्ता नहीं था। जब उन्हें कोई फायदा नहीं नजर आया तो मित्तल अस्पताल वालों ने दोबारा आप्रेशन करनें को कहा और खर्चा 40 हजार बताया, पैसे की कमी के कारण जाकिर परेशान होकर अपने नजदीकी अलआफिया अस्पताल मांडीखेड़ा में लेकर डाक्टर नसीम अहमद.,डॉ गोविंदानारायण चौधरी, डाक्टर फारूक खान से पांव का इलाज कराने की गुहार लगाई जिन्होने बड़ी सुझबुझ के साथ पांव का आप्रेशन कर सरकारी अस्पताल की हैमियत को लोगों के दिलों में लौटा दी और डाक्टर फारूक खान और समस्त स्टाप नें कहा कि अपना ईलाज सरकारी अस्पताल में करवाओ प्राईवेट अस्पतालों में लूटनें के नां जाएं। प्राइवेट अस्पतालों में अच्छे व अनुभवी डाक्टर मौजूद हैं।
वारिस 6 महीने से बैहोशी की हालत से गुजर रहा था जिसका अलआफिया अस्पताल में इलाज किया गया और उसके परिवार की मुस्कुराहट लौटा दी और अल्लाह तआला के हुक्म से जिसका सफल आप्रेशन हो गया और मरीज की हालत ठीकठाक हो गयी है। जिससे जाकिर व उसका सारा परिवार खुश नजर आ रहा है। और दिमागी डाक्टर घनश्याम अलवर द्वारा दिमाग का इलाज कराया गया जिसमें एक सप्ताह और 5 हजार रुपये का भुगतान करना पड रहा है।

इस आप्रेशन के बाबत जब डॉक्टरों से बात की गई तो उन्होंने बताया कि मरीज की हालत तो नाजुक है। लेकिन आप्रेशन करना पड़ेगा जब आप्रेशन की शुरुआत की गयी तो मरीज की BP लौ थी और हिमोग्लोबीन और खून की मात्रा बहुत कम थी इतना ही नही आप्रेशन के दौरान रक्तस्राव बहुत ज्यादा था जिसे कंट्रोल कर लिया गया और डॉक्टर की सुझबुझ नें जाकिर के बेटे वारिस का पांव का आप्रेशन शुरू किया और यह आप्रेशन लगभग 6 घंटा चला जिसमे डाक्टर की जानकारी अनुसार प्लेट के पेज टूटे हुए और जिसमें स्क्रू फंसे हुए थे जिसमें से फंसे हुए स्क्रू निकाल कर रोड डाल दी गई जिसकी वजह से वारिस की जिंदगी में मुस्कुराहट लौट आई  और वारिस जब आप्रेशन के बाद बाहर लाया गया तो सबसे पहले मां को पुकारा जो 6 महीने से बेहोशी की हालत में गुजार रहा था आज वारिस की तबियत मैं काफी सुधार नजर आ रहा है।
इस सफल आप्रेशन में डाक्टर गोविंदा नारायण चौधरी डाक्टर नसीम अहमद, डॉ फारूक खान,डॉ विशाल सिंगला, डाक्टर विनोद सर्जन और नर्स स्टाफ़ में डाक्टर प्रतिभा और डाक्टर रेखा मौजूद रही।