दहेज़ और शादियों में फिजूलखर्ची सभी समाज के लिए बना नासूर-सहेली शाबान खान।

राष्ट्रीय स्तर पर महिलाओं के लिए उत्थान एवं कल्याणकारी कार्य कर रही सहेली संस्था की राष्ट्रीय अध्यक्षा शाबान खान ने एक प्रेस रिलीज़ जारी करते हुए कहा की आज लोग शादियों में न केवल अनाप शनाप फिजूल खर्ची और दहेज़ के नाम पर बड़े पैमाने पर  नुमाइश और दिखावा कर रहे हैं, बल्कि ऐसी सामाजिक कुप्रथाओं से भारत के हर समाज की जड़ों को कमज़ोर और खोखला कर रहे हैं। और यही कारण है की आज बेटियों के लिए दहेज़ का एक छोटा सा फोड़ा कैंसर जैसी ला एलाज बीमारी का रूप धारण कर नासूर बन चुका हैं ।
 उन्होंने कहा की सहेली राष्ट्रीय स्तर पर “दहेज़ नहीं शिक्षा है, बेटी का अधिकार” और इसी तरह बेटी का खानदानी विरासत में जो हिस्सा बनता है इस्लाम धर्म ने बताया है उस पर समाज अमल करे इस को लेकर मेवात के एतिहासिक गाँव गांधी ग्राम घासेडा से इस अहम मुहीम का आगाज़ बड़ी आबो ताब के साथ होने जा रहा है सहेली तजीम के संरक्षक फिरोज खान ने बताया कि इस मुहिम की  शुरआत वह दिल्ली से ६० किलोमीटर की दूरी पर बसे मेवात क्षेत्र के सेंट्रल इलाक़ा नूह, फ़िरोज़पुर झिरका और पुन्हाना के आस पास के  कई दर्जन गावों में तीन दिवसीय दौरा करके कर रही है। इस दौरान वह लोगों के बीच दहेज़ और शादियों में फ़िज़ूल खर्ची बंद करने पर बल देंगी। और लोगों को सन्देश देकर जागरूकता फ़ैलाने का काम करेंगीं।
उन्होंने मेवात क्षेत्र के सामाजिक कार्यकर्ताओं, बुद्धिजीवियों, पत्रकरों,  युवाओ, छात्र छात्राओं और  मुख्य रूप  से महिलाओं से इस मुहीम से जुड़कर “दहेज़ नहीं शिक्षा है बेटी का अधिकार”  खानदानी विरासत हे बेटी का हक़ पर समर्थन और सहयोग माँगा है ।
Fhotu शबाना ख़ान Sadr shelyi organization
Firoz Khan no 9810461735